Tuesday, 21 June 2011

पंखों में ढाल लिया है...............





जीवन 

सांसों से ही नहीं, सपनों से भी चलता है 


सपना 

आँखों में ही नहीं,  हृदय में भी पलता है 


मैंने पाला है 

सपनों को 

ऐसे 

जैसे 

कोई हंस पाल लिया है 


यानी 

उड़ान के लिए 

अस्तित्व को

पंखों में ढाल लिया है 


- पूजा  भक्कड़


5 comments:

  1. aashish maheshwari21 June 2011 at 20:46

    nice poem


    सपना

    आँखों में ही नहीं, हृदय में भी पलता है

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  2. is hans ki udaan aapke sapne ko hameshaa aakaash ki sair karaaye........

    good luck pooja ji !

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  3. बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति दी है आपने!

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  4. बहुत सुन्दर रचना...वाह!!

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  5. यानी

    उड़ान के लिए

    अस्तित्व को

    पंखों में ढाल लिया है
    bahut sunder....

    sapne bunte rahen baya ki tarah ...

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